भोपाल । देश और प्रदेश में जब भी चुनाव होते हैं, कांग्रेस हार के डर से ईवीएम, जांच एजेंसी एवं न्यायालय पर सवाल खड़ा करती है। केजरीवाल की गिरफ्तारी की निंदा करना, आंतकवादियों का समर्थन करना, न्यायालय के फैसलों पर आपत्ति करना और देश विरोधियों का साथ देना कांग्रेस और दिग्विजय सिंह का मूल चरित्र रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश का जो कायाकल्प हो रहा है, उसके चलते पूरे देश में मोदी जी और भाजपा के पक्ष में लहर है। आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होना तय है और कांग्रेस पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए दिग्विजय सिंह भोजशाला को मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके सर्वे का आदेश न्यायपालिका ने दिया है। यह दिग्विजय सिंह के द्वारा स्पष्ट तौर पर न्यायालय की अवमानना है। मेरा न्यायपालिका से अनुरोध है कि इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेकर दिग्विजय पर न्यायालय की अवमानना का केस दर्ज होना चाहिए। इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर आरोप लगाने वाली कांग्रेस और इंडी गठबंधन में शामिल पार्टियों को भाजपा से कम सांसद होने के बाद भी ढाई गुना अधिक चंदा मिला है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने दिग्विजय सिंह द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड एवं भोजशाला मामले को लेकर की गई पत्रकार-वार्ता के संबंध में अपने बयान में कही। 

दिग्विजय सिंह और कांग्रेस बताए कि उन्होंने कहां से वसूली की
प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड को भारतीय राजनीति में काले धन के चुनावी चंदे का वर्चस्व समाप्त करने के लिए लाया गया था। इलेक्टोरल बॉन्ड पर सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही का हम सम्मान करते हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड को हम पारदर्शी दान कहते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी इसे वसूली कहती है। दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं के संज्ञान में रहना चाहिए कुल 20 हजार करोड़ के चुनावी बॉन्ड में से भाजपा को 303 सांसद होने के बाद भी सिर्फ 6 हजार करोड़ मिले हैं। वहीं कांग्रेस सहित इंडी गठबंधन के 242 सांसद ही हैं, जिन्हें 14 हजार करोड़ चुनावी बॉन्ड से मिले हैं। जब इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सभी के सामने आएगी तो कांग्रेस और इंडी गठबंधन में शामिल दल देश की जनता से नजरें नहीं मिला पाएंगे। इलेक्टोरल बॉन्ड को वसूली कहने वाले दिग्विजय सिंह बताएं कि काग्रेस और इंडी गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों ने चुनावी बॉन्ड की वसूली कहां-कहां से की है।

विपक्षी दल नकद राशि लेकर काले धन को बढ़ावा दे रहे
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को वर्ष 2023 में मिले चुनावी फंड में 97 प्रतिशत राशि चुनावी बॉन्ड के रूप में मिली है, जबकि सिर्फ 3 प्रतिशत राशि ही नकद में मिली है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल के नेता राजनीतिक चंदा नकद में लेते हैं और उसे अपने जेब में रखकर काले धन को बढ़ावा देते हैं। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों की भ्रष्ट कार्यशैली ऐसी थी कि 1100 रूपए चंदे के नाम पर लेते थे और 100 रूपए ही पार्टी में जमा करते थे और बाकी बचे 1000 रूपए अपने स्विस बैंक के काले खातों में जमा कराते थे। इसी कारण भारतीय जनता पार्टी ने भारतीय राजनीति से काले धन का वर्चस्व समाप्त करने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड लेकर आई थी। 

दरकने लगी कांग्रेस की जमीन
प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि तुष्टिकरण की नीति के माध्यम से कांग्रेस पार्टी ने जो अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की थी, वो उसे दरकती दिखाई दे रही है। कांग्रेस से जनता तो क्या उसके नेताओं का ही मोहभंग होने लगा है और हर दिन बड़ी संख्या में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। जिनमें मुस्लिम वर्ग के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हैं। बिना किसी भेदभाव के लागू की जा रही सरकारी योजनाओं से मुस्लिम वर्ग के जीवन में भी खुशहाली आई है। इस स्थिति से दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेस नेता बौखला गए हैं और अपने राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।

अदालत के आदेश पर हो रहा एएसआई सर्वे
प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह को धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाने से पहले यह जान लेना चाहिए कि धार स्थित भोजशाला परिसर में एएसआई का सर्वे इंदौर हाईकोर्ट के आदेश पर हो रहा है। एक सामाजिक संस्था द्वारा लगाई गई याचिका पर न्यायालय ने उक्त आदेश पारित किया था। सर्वप्रथम तो दिग्विजय सिंह ने बिना जानकारी के इस सर्वे पर जो आपत्ति लगाई है, उसे स्पष्ट करें। यह धार्मिक भेंदभाव का आरोप स्पष्ट तौर पर न्यायालय की अवमानना है, जिस पर न्यायालय को स्वतः संज्ञान लिया जाकर अवमानना का केश दर्ज होना चाहिए। दिग्विजय सिंह को तुष्टीकरण पर विश्वास है और वे सदैव हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाओं पर आघात पहुंचाते रहे हैं। बिना किसी तथ्य और तर्क के प्रभु राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले कांग्रेसी अब भोजशाला में एएसआई के सर्वे पर प्रश्न-चिन्ह खड़ा कर रहे हैं। कांग्रेसियों को न तो प्रभु राम पर विश्वास है और न ही देश के संविधान और न्यायपालिका पर। कांग्रेस नेता और दिग्विजय सिंह अप्रसांगिक हो गये हैं और अपना अस्तित्व खो चुके हैं, यह वहीं हैं, जिन्होंने राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का न्यौता तक ठुकरा दिया था और अब मॉ सरस्वती के मंदिर भोजशाला पर तुष्टिकरण की रोटियां सेक रहे हैं। दिग्विजय सिंह लोकसभा चुनाव की करारी हार से पहले जानबूझकर विषवमन कर रहे हैं, ताकि सामाजिक विद्वेष व तनाव पैदा कर राजनीतिक लाभ लिया जा सके।